About Thej - Kshitij

 क्षितिज


एक आंधी आ कर चली गई

एक बादल फट कर बरस गया

कल अम्बर में तपता था जो

आज वो सूरज पिघल गया 


एक दोस्त मिला था चमकीला

सोने चाँदी में ढला हुआ

तेज़ गति से बहता था

थोड़ा जल्दी में रहता था


जी भर हर रोज़ ही जिया था वो

गहरी घूँटों से पिया था वो

अनुभवों में उसका मन रमता

हर रोज़ ढूँढता मोड़ नया


पहाड़ हो या हो दौड़ कोई

साथ वो सबके चलता था

और साथी गर कोई नहीं मिले

तो ख़ुद ही वो आगे बढ़ता था


ये कर लूँ वो भी कर लूँ में

इस से उस से भी मिल लूँ में

यहाँ वहाँ हो आऊँ ज़रा

जीवन का सारा रस चख लूँ मैं


थी तेज नाम की हनक अलग

जो कहता था वो करता था

कई बार उससे गिरते देखा

गिर कर हर बार वो उठता था


इस बार गिरा तो ऐसे उठा

के आसमान को चीर गया 

उस अंतिम शिखर पर जा पहुँचा

जहाँ अम्बर धरती से मिलता था


एक आंधी आ कर चली गई

एक बादल फट कर बरस गया


कल अम्बर में तपता था जो

आज वो सूरज पिघल गया

कल अम्बर में तपता था जो

आज वो सूरज पिघल गया

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